Saturday, January 9, 2021

Gardening (बागवानी)

इसमें कोई शक नहीं कि गार्डनिंग द्वारा हम अपने इंडोर और आउटडोर को अलग लुक दे सकते हैं और समय के साथ  साथ इसकी लोकप्रियता भी बढ रही है। बागवानी से हमारे तन और मन दोनों को शांति मिलती है, साथ ही अकेलापन भी दूर होता है क्युकि प्रकृति से बड़ा कोई दोस्त हो ही नहीं सकता। इसके अतिरिक्त बगवानी द्वारा वजन भी कम किया जा सकता है क्युकि हमारी माँसपेसिओ की इससे एक्सरसाइज हो जाती है जिससे हमें कई बीमारियों से राहत  मिलती है। कई लोगो को बागवानी का शौक तो होता है पर वो अपनी बीमारी, वज़न,या खाली जमींन की कमी के कारण इस शौक को पूरा नहीं कर पाते, साथ ही हम अक्सर सोचते है की इसके लिए बड़ी जगह होना जरुरी है पर ऐसा नहीं है गार्डनिंग कई प्रकार से की जा सकती है जिनमें विभिन्न प्रकार की शैलियो,तकनीको और स्थान के हिसाब से पौधो का चुनाव शामिल है। आइये हम बागवानी के प्रकार के बारे में जाने।

बागवानी के मुख्य  प्रकार है




























  


















                           

























                                                                                   





                                                  




Saturday, June 1, 2013

Gardening tools


गार्डनिंग टूल्स (gardening tools)-
ऐसे टूल्स जिनका उपयोग पौधो को लगाने, उन्हें विकसित करने और उनका रख-रखाव करने के लिए किया जाता है उन्हें गार्डनिंग टूल्स कहते हैं। ये विभिन्न प्रकार के होते है पर हमें अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका चुनाव करना चाहिए। आइये हम इनके प्रकार के बारे में जानें-








A. प्रूनेर(pruner-छाँटने वाला)-
इसके अंतर्गत shears,loppers और bypass pruners.

1.शिर्ज़/शिहर्ज़(shears)- ये बड़ी केंची जैसी होती है ये fens,hedges(बाड़ी),छोटी शाखा काटने के काम आती है।







2.लोप्पर(lopper)- इसके हैंडल लम्बे होते हैं और डेढ इंच तक की शाखा काटने के काम आता है।








3.बाईपास प्रूनेर(bypass pruner-छाँटने वाला)- ये फूलों और झाड़ियों की कोमल और नयी शाखा को काटने के काम आती है।









B. हैण्ड टूल्स(hand tools-हाथ के औजार)-
इसके अंतर्गत trowel(खुरपी), weeders(निदाई-गुडाई,घासपात निकलना) और cultivators(ज़मीन जोतने का यंत्र) आते हैं।

1. ट्रोवेल(trowel-खुरपी)- ये फावड़े का छोटा रूप है। ये मिट्टी को आसानी से काटता है और छोटे पौधो को रोपने के लिए एकदम सही है।








2. वीडर(weeder-निदाई-गुडाई या घासपात निकालने का औज़ार)- ये घासपात को जड़ से निकालने के काम आता है।








3. कल्टीवेटर(cultivator- ज़मीन जोतने का यंत्र )- इसका उपयोग मिट्टी में खाद (फ़र्टिलाइज़र),खाद्य अपशिष्ट (फ़ूड कम्पोस्ट) और अच्छी क्वालिटी की मिट्टी मिलाने के लिए किया जाता है।






4. हैण्ड फ़ोर्क (hand fork-कांटेदार)- इसका उपयोग मिट्टी को खोदने (digging), उठाने(lifting) और मिलाने (tossing) के लिए किया जाता है।









C. शवल(shovels- बेलचा या फावड़ा)-
ये टूल रोपने (planting),पत्थर को हटाने और मिट्टी को फ़ैलाने में हेल्पफुल होते है। इसके अंतर्गत round point, squre point, scoop shovels and garden fork, hoe आदि आते है।

1. राउंड पॉइंट शवल (round point shovel-गोलाकार बेलचा)- इनका उपयोग मिट्टी में गड्ढा बनाकर पौधे लगाने और वानस्पतिक खाद बनाने के लिए किया जाता है।







2. स्क्वायर पॉइंट शवल (square point shovel-आयताकार बेलचा)- इसका उपयोग मिट्टी को इकठ्ठा करने ,उठाने ,किनारों (मेड़) को बनाने और खाली करने के लिए किया जाता है।







3. स्कूप शवल (scoop shovel-उदगर्त बेलचा)- इसका उपयोग क्यारी में से कचरा उठाने के लिए किया जाता है।








4.होए (hoe-फावड़ा)- इसका उपयोग मिट्टी को इधर से उधर खिसकाने, अनावश्यक खरपतवार निकालने, पौधे के चारो ओर मिट्टी भरने, हल्का गड्ढा करने और क्यारियाँ बनाने के लिए किया जाता है।








D. रेक (rake-घास जमा करने का औज़ार)- 
इसका उपयोग कचरा, पत्ती ,सूखी पत्ती आदि को गार्डन से साफ़ करने के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत leaf, lawn rakes, thatching, steel bow आदि आते हैं।

1. लीफ रेक (leaf rake)- ये नीचे से चौड़े होते हैं और इसमें 24-30 कांटे होते है जो पत्तियाँ साफ़ करने के लिए एकदम आदर्श होते हैं।








2. स्मॉलर लीफ रेक (smaller leaf rake)- इसमें 10-15 काँटे होते हैं इसका उपयोग मुख्य रूप से फूलों की क्यारी और गार्डन साफ करने में होता है।








3. थैचिंग (thatching- छाजन)- इसका उपयोग घास, काई (moss) और सूखी घास को लॉन से साफ़ करने के लिए किया जाता है।








4. स्टील बो (steel bow)- ये स्टील के काँटों (tines) से बने होते हैं और लीफ रेक ,लॉन रेक की तरह मुड़ते नहीं हैं। ये पौधो की क्यारी बनाने के काम आते हैं।







5. लॉन रेक (lawn rake)- ये लीफ रेक जैसे ही होते हैं परन्तु छोटे पौधो और छोटे लॉन से कचरा निकालने के लिए इसके काँटे (tines) छोटे और ज्यादा पास होते हैं।









E. वाटरिंग कैन (watering can- डोलची)-

वाटरिंग कैन बहुत ही सरलता और सोम्यता के साथ पौधे के चारो ओर पानी को एक साथ फैलाता है जिसके कारण बीज़ और नए पौधे जमींन से उखड़ते नहीं है।









F. होसपाइप विथ स्प्रिंकलर(hosepipe with sprinkler-पानी की नली फव्वारे के साथ)-

होसपाइप पौधों को ज्यादा मात्रा में एक साथ पानी देने का एक शानदार तरीका है इसमें स्प्रिंकलर जोड़ देने से पानी बौछार के रूप में पौधो पर पड़ता है जिससे उन्हें किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है।










G. व्हील बैरो(wheel barrow-ठेला गाड़ी)-  

व्हील बैरो कई प्रकार के साइज़ में उपलब्ध होते है ये मिट्टी, पौधो, खाद, सूखी घास, पानी की नली, टूल्स आदि सभी वस्तुओ को एक स्थान से दुसरे स्थान तक ले जाने के काम आता है।













H. ग्लव्स(gloves-दस्ताने)- 

गार्डनिंग टूल्स को पकड़ने से हाथों में निशान बन जाते हैं और मिट्टी से हाथ तथा नाख़ून भी गंदे हो जाते हैं। चमड़े या रेग्जीन के ग्लव्स इन सभी परेशानियो से हमें बचाते हैं।














दोस्तों आशा करती हूँ ये जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी। 





Soilless gardening


सोइललेस (मिटटी रहित) गार्डनिंग (soil-less gardening)-

पौधो को उनकी जड़ो के साथ कंटेनर में परंतु मिट्टी की जगह पोषक तत्व के घोल में नियंत्रित परिस्थितियों जैसे प्रकाश, तापमान, आद्रता में विकसित करना सोइललेस गार्डनिंग कहलाता है। यह इंसानों द्वारा निर्मित एक परिस्थिति है जिसमे आक्सीज़न, हाईड्रोज़ेन और कार्बन को एक विशेष तरीके से एक साथ मिलाया जाता है जिससे मानव निर्मित पोलिएस्टर बनता है। सोइललेस गार्डनिंग को केमिकल गार्डनिंग, केमी कल्चर, हाईड्रो फोनिक्स आदि नामों से भी जाना जाता है।   

सोइललेस गार्डन में लगाये जाने वाले पौधे- 


--ग्रीन अनियन




गाज़र(केरेट)--

--फूल गोभी(कौली फ्लावर)



पत्ता गोभी(कैबेज)-- 

--फली(बीन्स)




गिलकी--

--ब्रोक्कोली




ग्रीन पेपर--

--तरबूज(मेलोन)




लेटिष--

--टमाटर(टोमेटो)




मटर(पीस)--



 --स्क्वाश(कुम्हड़ा)




पालक(स्पनिच)--


दोस्तों आशा करती हूँ ये जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।

Thursday, May 30, 2013

Greenhouse gardening


ग्रीनहाउस गार्डनिंग (greenhouse gardening)-

ग्रीनहाउस काँच की दीवार और छत के साथ एक घर होता है जिसका उपयोग नियंत्रित परिस्थितियों में पौधो को उगाने के लिये किया जाता है। ज्यादातर ग्रीनहाउस एक ग्लास हाउस की तरह होते है जिनका उपयोग ठण्ड के दिनों में पौधो को विशेष रूप से विकसित करने के लिए किया जाता है। ग्रीनहाउस सूर्य की ऊष्मा को अवशोषित करके कार्य करते हैं। ग्रीनहाउस के बहुत से फायदें है जिनके कारण इन्हें पसंद किया जाता है जैसे ठण्ड के दिनों में भी ये पौधो को गर्म रखते है जिससे सर्दियों में भी पौधो को उगाया जा सकता है, अगले सीजन के लिए पौधो को स्टॉक (भण्डारण) के रूप में विकसित करके रखना, बिना मौसम बीजों से पौधे प्राप्त कर लेना, विविधता को बढाना, नई किस्मों को विकसित करने के लिए नए-नए  प्रयोग करना संभव आदि कारणों से ग्रीनहाउस गार्डनिंग को बहुत पसंद किया जाता है।  

ग्रीनहाउस गार्डन में लगाये जाने वाले पौधे-      


--बॉल कैक्टस




एलोवेरा--

--कैप-लिली




 ब्लैक-बेम्बू--

-- डेजर्ट-रोज़




सिकड--

--जास्मीन




गार्डिनिया--

--पेंसिल कैक्टस




आर्किड प्लांट--

--रोज़-मेरी




पिंक स्प्लैश--



--पाइनएप्पल प्लांट







दोस्तों आशा करती हूँ ये जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।

 
biz.