Monday, April 22, 2013

Water gardening


 वाटर (पानी में) गार्डनिंग (water gardening)-
पानी की आवाज सबका ध्यान अपनी और खीच ही लेती है और गार्डन में तो पानी एक आकर्षक तत्व होता ही है।मूल रूप से वाटर गार्डन पानी का संग्रह होता है जो जलीय पौधो ,अस्थायी पौधो ,फिश ,जीव जंतु (creatures) का घर होता है। ये छोटा से छोटा और बड़े से बड़ा  जैसे कि एक बोउल में मनी प्लांट या फिर बाथ  टब या  पोंड (तालाब) हो सकता है। वाटर गार्डन को आकर्षक बनाने के लिए फाउंटेन ,रॉकवर्क ,रेत-बजरी का यूज़ किया जाता है चाहे तो इसमें घोंघे जो की शैवाल ,मछली के अपशिस्ट और कार्बनिक पदार्थ को खा लेते है जोड़ सकते हैं। परंतु मछली और घोंघे को वाटर गार्डनिंग में तभी ऐड करना चाहिए जब हम इनका सही तरीके रखरखाव कर सकें। वाटर गार्डनिंग के लिए हमेशा ये जरुरी नहीं है की प्राकृतिक तालाब और बड़ी जगह हो। ये कांक्रीट डिश ,हाफ बैरल ,प्लास्टिक टब और ऐसे किसी भी बर्तन में बनाया जा सकता है जिसमे पानी को रखा जा सके।

वाटर गार्डन में लगाये जाने वाले पौधे-
वाटर गार्डनिंग प्लांट को हम ३ भागो में डिवाइड करते हैं सब्मर्ज़ड ,मार्जिनल और फ्लोटिंग। 
सब्मर्ज़ड- वे पौधे जो पूरी तरह से पानी में डूबे रहते है।
मार्जिनल- वे पौधे जिनकी जड़े तो पूरी तरह पानी में डूबी रहती है पर बाकि भाग पानी से उपर रहता है। 
फ्लोटिंग- वे पौधे जिनकी जड़े न तो पूरी तरह से मिट्टी में बंधी  रहती है और वे पूरी तरह से पानी में तैरते रहते है। 
इनके कुछ उदाहरण हैं -


लोटस फ्लावर---




---वाइट वाटर-स्नोफ्लैक



---एलीगेटर वीड




अनाचेरिस प्लांट--- 



---एरोहेड



 कैटटेल--- 




--- डकवीड



फैरी-मोस---



---टेप ग्रास



ग्रास कॉर्कस्क्रू ---


--- वाटर लेटिष



वाटर फ़र्न---




 ---वाटर हयासिन्थ



वाटर वेलवेट---


 ---वाटर लिली



जापानीज रश ---



---फ्रॉग बिट


मोज़ेक प्लांट---




कैसे लगाया जाता है पौधो को कंटेनर में-

 इसके लिए आपको जरुरत होगी-  कंटेनर, ईट या स्टैंड ,जलीय पौधे(गमले सहित),सजावटी पत्थर ,वाटर गार्डन सोइल (मिट्टी), पानी आदि।




1. सबसे पहले एक कंटेनर (गमला) लिया जाता है जिसमे  ड्रेनेज होल न हो (पानी बाहर निकलने के लिए एक छोटा सा छेद) हो।






2. अब कंटेनर में किसी भी किनारे पर ईट या स्टैंड रखा जाता है जिस पर कि छोटे जलीय पौधो को रखा जा सके।






3. अब बड़े जलीय पौधो को कंटेनर के बेस में रखा जाता है और छोटे जलीय पौधो को ईट या स्टैंड पर जिससे की वे पूरी तरह पानी में न डूबें।




4. इसके बाद  कंटेनर में पानी भर दिया जाता है अब जहाँ एक्स्ट्रा पत्तियाँ हो उन्हें कट करके फिनिशिंग टच दिया जाता है।




5. अंत में कुछ सजावटी पत्थर लेकर कंटेनर में रखे छोटे गमलों में इस तरह रखे जाते है कि वे आधे पानी से बाहर दिखाई दें चाहे तो फाउंटेन भी ऐड कर सकते हैं।फिर पानी में तैरने वाले जलीय पौधे (फ्लोटिंग प्लांट्स) को पानी में छोड़ दिया जाता है। इसतरह तैयार हो जाता है कंटेनर वाटर गार्डन।





दोस्तों आशा करती हूँ ये जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।










































Container gardening



कंटेनर (गमला) गार्डनिंग (container gardening)- 
खुले मैदान की तुलना में कंटेनर गार्डनिंग पौधो को विकसित करने के लिए नया आयाम देती हैं। इसमें पौधो के रखरखाव का नियंत्रण गार्डनर पर होता है। मौसम के हिसाब से पौधो को धुप में या शेड में रखा जा सकता है। कंटेनर गार्डनिंग में अपार्टमेंट में रहने वाले लोग भी अपने बागवानी के शौक को पूरा कर सकते हैं इसमें सब्जियाँ ,फुल-पौधे ,हर्ब्स आदि लगाये जा सकते हैं। इसमें विभिन्न प्रकार के कंटेनर्स का यूज़ किया जा सकता है जैसे चीनी मिट्टी के बर्तन,पुराने डब्बे ,बाथ टब यहाँ तक की छोटे से छोटे टी कप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे अच्छी बात ये है की इसमें भुमिजनित बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है और घर की बची सब्जी-तरकारी का उपयोग जैविक खाद में किया जा सकता है। यदि समूहों में कंटेनर्स को कलर कॉम्बिनेशन के साथ व्यस्थित किया जाये तो घर की सुन्दरता को भी बढाया जा सकता है।

कंटेनर गार्डन में लगाये जाने वाले पौधे-

कंटेनर गार्डनिंग में हम सभी प्रकार के पौधो को लगा सकते है जैसे सजावटी, सदाबहार, इंडोर, आउटडोर, बारहमासी, जलीय पौधे, हर्ब, फ्रूट, शेड आदि। इनके कुछ उदाहरण हैं -


---वाइल्ड टर्मरिक 




ब्लीडिंग-हार्ट फ्लावर--- 



---शास्ता डेज़ी


    

गेरबेरा डेज़ी फ्लावर ---



---डेहलिया




चम्पा---



---अडेनियम




वाटर लिली ---

---ग्रीन ड्रेसेएना




बारहमासी---


---जाडे प्लांट




 पेपरोमिया---

---सूरजमुखी




गुलाब ---

 
 कैसे लगाया जाता है पौधो को कंटेनर में-
इसके लिए आपको जरुरत होगी-  कंटेनर, अच्छी क्वालिटी की मिटटी, पौधे या बीज, खाद, पानी आदि।

1. सबसे पहले एक कंटेनर (गमला) लें जिसमे एक ड्रेनेज होल (पानी बाहर निकलने के लिए एक छोटा सा छेद) हो।







2. फिर कंटेनर में सबसे पहले कंकड़-पत्थर की एक लेयर बिछाये।






3. इसके बाद मिट्टी में खाद (कम्पोस्ट) मिला लें और कंटेनर को आधे से ज्यादा इस मिट्टी से भर दें।







4. अब खुर्पी (मिट्टी में गड्ढा करने का औजार) की मदद से मिटटी में एक गड्ढा करें और उसमे पौधे को लगा दें,ध्यान रखे की जड़ अच्छी तरह मिट्टी में दब जाये फिर हलके हाथो से मिट्टी को ढक  दें।








5. अंत में हल्का पानी डालें ताकि पौधा गिरे नहीं और जड़ अच्छी तरह मिट्टी को पकड़ ले। अगले दिन ज्यादा पानी डाल सकते हैं।


कंटेनर गार्डनिंग के औजार (टूल्स) -

दोस्तों टूल्स के बिना बागवानी संभव नहीं है आइये हम जानें कंटेनर गार्डनिंग के लिए कौन कौन टूल्स की जरुरत होगी।

1. एयर स्प्रयेर (air sprayer)- जब मौसम में हुमिडिटी (उमस) ज्यादा हो (ऐसा अक्सर बारिश के मौसम में होता है) तो पौधो पर हल्का पानी छिड़कना चाहिए जिससे उनमे फ्रेशनेस(ताजगी) आ जाती है।
2. स्क्रब ब्रश (scrub brush)- ये लोहे के तार का बना होता है। जब पुराने कंटेनर में नया पौधा लगाना हो या किसी कंटेनर को साफ करना हो तो कंटेनर में जमी मिट्टी या काई (moss) को साफ करने के लिए स्क्रब ब्रश का यूज़ किया जाता है।

3. हैण्ड ट्रक या व्हील ब्रो (wheel brow)- कंटेनर को एक जगह से दूसरी जगह रखने और कचरा समेटने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।



4. वाटर कैन (water can)- वाटर कैन द्वारा पानी तो डालते ही है साथ ही लिक्विड फ़र्टिलाइज़र का भी छिड़काव किया जा सकता है।

5. ट्रोवेल (trowel)- सामान्य भाषा में इसे खुरपी भी कहते हैं। इसकी सहायता से कंटेनर में मिट्टी भरी जाती है और साथ ही ये मिट्टी में खाद मिक्स करने के कम भी आता है।


6. फ़र्टिलाइज़र (fertilizer)- फ़र्टिलाइज़र (खाद) का उपयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति (ताकत) बढ़ाने के लिए किया जाता है। इससे पौधे जल्दी बढ़ते है तथा स्वस्थ रहते हैं।


7. ग्लव्स (gloves)- गार्डनिंग टूल्स को पकड़ने  से  हाथों  में  निशान  बन  जाते  है और मिट्टी से हाथ तथा नाख़ून भी गंदे हो जाते हैं। चमड़े या रेग्जीन के ग्लव्स इन सभी परेशानियो से हमें बचाते हैं।


8. प्रुनेर (pruner)- इसका अर्थ होता है छाँटने वाला, ये पौधे की छटाई करने और उन्हें शेप देने के कम आता है।



9. स्टेक्स (stakes)- कमज़ोर या नाज़ुक पौधो को सहारा देना जरुरी होता है नहीं तो वे मिट्टी में गिरकर सड़-गल जाते हैं। सहारा देने के लिए जिस लकड़ी का उपयोग किया जाता है उसे स्टेक्स (खूंटी) कहते है इसकी मदद से पौधे सीधे खड़े रहते हैं और सही तरीके से विकास कर पते हैं।
10. स्ट्रिंग एंड स्माल सीज़र (string and scissor)- पौधो को स्टेक्स (खूंटी) का सहारा  देने के बाद स्ट्रिंग (रस्सी) से उन्हें बांधा जाता है, जिससे कि पौधे मजबूती से खड़े रहें और सीज़र (केंची) का उपयोग रस्सी को काटने के लिए किया जाता है।

11.गार्डन जर्नल (डायरी)- इसमें आप बागवानी से जुडी कोई भी जानकारी लिख सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहे तो गार्डन जर्नल आपके बागवानी के कार्यो का संछिप्त वर्णन होता है।



12.डस्टपैन एंड ब्रूम (dustpan and broom)- डस्टपैन एंड ब्रूम (सुपड़ी और झाड़ू ) का उपयोग मिट्टी और कचरा समेटने के लिए किया जाता है।








दोस्तों आशा करती हूँ ये जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।

 
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